नशा का टापू…
निभीश कुमार सिंह “भारत और संपूर्ण विश्व में नशे की बढ़ती लत को देखते हुए, ख़ासकर बच्चों और युवाओं में इसके बढ़ते प्रभावों को देखते हुए ‘द यूनिवर्सिटी ऑफ़ द …
नशा का टापू… Read More
निभीश कुमार सिंह “भारत और संपूर्ण विश्व में नशे की बढ़ती लत को देखते हुए, ख़ासकर बच्चों और युवाओं में इसके बढ़ते प्रभावों को देखते हुए ‘द यूनिवर्सिटी ऑफ़ द …
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इतने दल, इतने नेता पर उन्नति का अभियान रुका है,गुमसुम हैं आकाश-दिशाएँ, फिर भी क्यों तूफ़ान रुका है? (1)गया नहीं क्यों तम जीवन सेदूर अभी भी सुख निर्धन सेभारत की …
इतने दल, इतने नेता पर…. Read More
जीवन का प्रवाह कितना सुंदर होता है। एक नदी की तरह। नदी के प्रवाह को कोई नाम नहीं दिया जा सकता। उसे समेटा नहीं जा सकता। नदी किसी एक की …
खोल के देखो प्यार की आँखें, सब तेरे सब मेरे…नदी का प्रवाह और हम Read More
वर्ष 2025 जा रहा है। और एक नया साल 2026 आ रहा है। कैसे करेंगे हम सब स्वागत इसका? प्रेम से या फिर नफ़रत से? हम अपने बच्चों को क्या …
प्रेम, त्योहार ,बच्चे और नया वर्ष Read More
दरख़्तों की एक अजीब कैफ़ियत होती है। वे बे-इंतिहा मोहब्बत करना जानते हैं । कही नहीं अनकही को भी सुन लेते हैं। 19 नवंबर 2025 एक बेचैन सुबह थी। उस …
सच्चिदानंद सिन्हा : अभूतपूर्व जीवन यात्रा (दरख़्तों के बहाने ) Read More
Original Writing : Avijit Pathak ll Hindi Translation : Shephali अंधेरे समय का यह दौर। जब विषाक्त और साधनवादी राजनीति हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गई हैं। सूचना प्रदूषण का …
यात्रा का संदर्भ Read More
पृथ्वी इतनी सुंदर क्यों है आज भी? प्रश्न बहुत साधारण है। इस सुंदरता का अर्थ सिर्फ़ बाहरी नहीं। एक अंतस यात्रा से होकर गुजरना होगा इस प्रश्न से उत्तर तक …
कुछ अनकही दास्ताँ पठन पाठन के गलियारे से । Story of A great Pedagogue : Prof. Avijit Pathak Read More
तुम गुरु भी हो, तुम सखी भी,ज्ञान की ज्योति, प्रीत की रीति भी।तुम हो ध्यान, तुम हो धारा,तुम हो जीवन की, मधुर रागिनी। तुमने पढ़ाया सिर्फ पन्ने नहीं,जीवन के अनुभव, …
तुम गुरु सखी हो Read More
संवाद : भाग एक (संवाद श्रृंखला में चित्रलेखा आज एक माँ-बेटी के बीच की बातचीत ले कर आये हैं। ऐसे संवाद का हम स्वागत करते हैं, जिनमें सामाजिक मूल्यों और …
माँ के सवाल, बेटी के जवाब Read More
निजी विद्यालय में फ़ीस को लेकर जितनी मारा-मारी है, उतने ही कठोर नियम हैं फ़ीस नियमित जमा करने के भी। ये विद्यालय अच्छी तरह जानते हैं कि फ़ीस कैसे वसूल …
शिक्षा, व्यवसाय और मानवीयता Read More