माँ
भाग – 1 माँ एक ऐसा शब्द है जिसमें संसार की सारी शक्तियाँ समाहित हैं। आम तौर पर ऐसा कहा जाता है। अगर कहा जाता है तो ज़रूर इसके अपने …
माँ Read More
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जीवन-मरण, ज्ञात-अज्ञात की प्रार्थना का कवि ‘तुम सुबह की पहली किरण/मैं नम दूब पर ओस का कण/मिलन पर सुनश्चित है/मेरा तिरोहित हो जाना/ फिर भी मिलन की इतनी आस क्यों …
शीतल जल कब इस ज्वाला को बुझायेगा… Read More