तुम गुरु सखी हो

तुम गुरु भी हो, तुम सखी भी,ज्ञान की ज्योति, प्रीत की रीति भी।तुम हो ध्यान, तुम हो धारा,तुम हो जीवन की, मधुर रागिनी। तुमने पढ़ाया सिर्फ पन्ने नहीं,जीवन के अनुभव, …

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